भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में वीरवार को बठिंडा की अदालत में अहम सुनवाई हुई। यह मामला तीन कृषि कानूनों के विरोध के दौरान बुजुर्ग महिला महिंदर कौर को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। वीरवार को कंगना रनौत अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुईं।

इस सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की ओर से पहले दायर की गई व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी पर अदालत में लंबी बहस हुई। कंगना के वकील ने दलील दी कि वह एक सांसद हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में व्यस्तताओं के कारण हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होना उनके लिए संभव नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि वह पहले भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश होती रहेंगी।

वहीं शिकायतकर्ता महिंदर कौर की ओर से उनके वकील रघुबीर सिंह बहिणीवाल ने इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि कंगना रनौत जानबूझकर व्यक्तिगत पेशी से बच रही हैं और इससे मामले की सुनवाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला पिछले चार वर्षों से लंबित है और पीड़ित पक्ष लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में व्यक्तिगत पेशी से छूट देना न्याय के हित में नहीं होगा।

पक्षों को सुनने के बाद पूशी से छूट

दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने कंगना रनौत की व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी को स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंगना आगामी सुनवाइयों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हो सकेंगी। इस मामले में इससे पहले भी गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और कुछ सबूत अदालत के समक्ष पेश किए गए हैं।

वहीं दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि किसान आंदोलन के दौरान इंटरनेट मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट के जरिए कंगना रनौत ने बुजुर्ग महिला महिंदर कौर की छवि को नुकसान पहुंचाया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 27 जनवरी तय कर दी है।

अगली तारीख पर गवाहों से जुड़े मुद्दों और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सुनवाई की जाएगी। महिंदर कौर ने एक बार फिर दोहराया कि वह न्याय मिलने तक इस लड़ाई को जारी रखेंगी।

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