पंजाब सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अब आंगनबाड़ी सेंटर से लेकर निजी प्ले वे स्कूलों तक एक समान सिलेबस लागू करने का फैसला किया है। इस फैसले का उद्देश्य छह साल से कम उम्र के बच्चों को एक जैसी शैक्षणिक और विकासात्मक दिशा देना है।

इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्ले वे स्कूलों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य और आसान बनाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू कर दिया है। विभाग की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि प्ले वे स्कूलों के पंजीकरण की प्रक्रिया पहले भी शुरू की गई थी, लेकिन निजी स्कूल प्रबंधकों की ओर से इसमें अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई गई।

इसी कारण अब रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक प्ले वे स्कूल इस दायरे में आ सकें और उनकी निगरानी संभव हो सके।

राज्य में 16 हजार प्ले वे स्कूल संचालित

डॉ. बलजीत कौर के अनुसार, पंजाब में करीब 16 हजार प्ले वे स्कूल संचालित हो रहे हैं, लेकिन अब तक केवल लगभग 300 स्कूलों ने ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी प्ले वे स्कूल पंजीकृत हों और निर्धारित सिलेबस के अनुसार ही बच्चों को शिक्षा दें।इसके साथ ही विभाग की ओर से 27 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब 6 हजार स्टाफ सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।

प्रारंभिक शिक्षा के लिए सिलेबस तैयार

मंत्री ने बताया कि सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा के लिए बाकायदा एक सिलेबस तैयार किया है, जिसमें बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।

इसके अलावा पंजाब सरकार ने राज्य के एक हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक रूप देने का भी फैसला किया है। करीब 130 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 100 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर पर और 30 करोड़ रुपये आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए फर्नीचर की खरीद पर खर्च किए गए हैं। मंत्री ने स्वीकार किया कि फिलहाल कुछ केंद्रों में बच्चे दरी पर बैठते हैं, लेकिन आने वाले समय में इस व्यवस्था को पूरी तरह बदला जाएगा।

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