पंजाब में हाल ही में 19 वर्षीय छात्र की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत के मामले के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पिछले दो वर्षों के दौरान उन सभी मामलों का विस्तृत ब्योरा मांगा है, जिनमें पुलिस हिरासत से कथित तौर पर भागने के दौरान आरोपी मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए।

यह निर्देश उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें ऐसे मामलों में संवैधानिक सुरक्षा उपायों के सख्ती से पालन की मांग की गई है। याचिकाकर्ता निखिल सराफ ने अदालत से अनुरोध किया है कि राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह पिछले दो वर्षों में पुलिस हिरासत में रहते हुए या हिरासत से भागने के तुरंत बाद मारे गए या घायल हुए आरोपियों की कुल संख्या का विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।

सख्त कानूनी कार्रवाई की रखी मांग

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी में आरोपी हिरासत से भागे बताए गए हैं, उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा विवरण भी पेश किया जाए।साथ ही यह भी मांग की गई है कि यदि किसी अधिकारी ने कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ के आदेश दिए हैं या ऐसे अवैध आदेशों को लागू किया है तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि ऐसे मामलों में जानकारी देने वाले व्हिसल ब्लोअर या अन्य व्यक्तियों को सुरक्षा दी जाए, चाहे वे पंजाब में हों या राज्य के बाहर। इसके अलावा पंजाब के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से भी रिपोर्ट मांगी जाए, जिसमें बताया जाए कि मुठभेड़ों में हुई मौतों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का कितना पालन किया गया है।

याचिकाकर्ता का दावा- घटनाक्रम एक जैसा

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ समय में पंजाब के विभिन्न जिलों में कथित तौर पर गैरकानूनी मुठभेड़ों और हिरासत में मौत के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। कई घटनाओं में पुलिस का दावा रहता है कि आरोपी हिरासत से भागने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद गोली चलानी पड़ी या उनके पैरों में गोली मारी गई।

याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे कई मामलों में घटनाक्रम लगभग एक जैसा बताया जाता है और अब तक किसी भी पुलिस अधिकारी को आरोपी के हिरासत से भागने देने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। इससे संदेह पैदा होता है कि कुछ मुठभेड़ पहले से तय हो सकती हैं और हिरासत में मौजूद आरोपियों को निशाना बनाया गया हो। अदालत ने इस मामले में पंजाब सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।

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