पंजाब और हरियाणा के किसानों ने सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से बैठक की शुरुआत कर दी है। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में शिष्टमंडल पंचकूला स्थित सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के कार्यालय में पहुंचा। डल्लेवाल के नेतृत्व में पहुंचा किसानों का शिष्टमंडल एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाने की मांग पर जोर दे रहा है। बैठक में शिष्टमंडल ने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्यों से यह साफ किया कि क्यों सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी जरूरी है। इसके अलावा, कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने को लेकर भी इस बैठक में चर्चा की उम्मीद जताई जा रही है। किसान संगठनों ने कर्ज माफी के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उनका कहना है कि मौजूदा कर्ज माफी योजनाओं पर पुनर्विचार की जरूरत है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को वास्तविक राहत मिल सके। इस दौरान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। किसान नेताओं ने कहा कि इन सिफारिशों को लागू करने से किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि क्षेत्र मजबूत होगा। किसानों के कर्जे पर हुई चर्चा सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के चेयरमैन जस्टिस नवाब सिंह ने बैठक के दौरान बताया कि 2022-23 में पंजाब के किसानों पर 73,673 करोड़ रुपये और हरियाणा पर 76,630 करोड़ रुपये का कर्ज था। अब यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। जस्टिस नवाब सिंह ने यह भी कहा कि कर्ज के बोझ को कम करने के उपायों पर गहरी चर्चा की आवश्यकता है, ताकि किसानों के जीवन को आसान बनाया जा सके। किसान संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि इस बैठक से उनकी समस्याओं का समाधान निकलेगा और सरकार किसानों के अधिकारों के पक्ष में ठोस कदम उठाएगी। Post navigation हाईकोर्ट का बड़ा फैसला — 34 साल पुराने केस में डीआईजी आनंद के परिवार को पेंशन एरियर पर 7.5% ब्याज का आदेश