पंजाब के अमृतसर जिले स्थित राधा स्वामी सतसंग ब्यास (आरएसएसबी) ने अपने मुख्यालय में वीआईपी ट्रीटमेंट और डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों के साथ फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर रोक लगाने का फैसला किया है। हालांकि प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार यह कदम डेरा की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार यह फैसला इस संदेश के साथ लिया गया है कि डेरा में सभी श्रद्धालु समान हैं और किसी को विशेष दर्जा नहीं दिया जाएगा। अब किसी भी वीआईपी आगमन के दौरान विशेष व्यवस्था नहीं की जाएगी और न ही डेरा प्रमुख के साथ फोटो खिंचवाने की अनुमति होगी। पर्सनल सुरक्षा गार्ड से भी अनुरोध किया जाएगा कि वे तस्वीरें लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर साझा न करें।

राजनीतिक चेहरों संग तस्वीरें वायरल होने से हुई चर्चाएं

सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में डेरा प्रमुख की कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुई थीं। हाल ही में उनकी नाभा जेल में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात और फिरोजपुर में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की नशा विरोधी पदयात्रा में उपस्थिति को लेकर भी सियासी हलकों में चर्चा रही। इस कार्यक्रम में भाजपा और अकाली दल के नेता भी मौजूद थे।

इन घटनाओं के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई थीं। चर्चा यह भी रही कि आगामी चुनावों में डेरा प्रमुख की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है या वे किसी सियासी गठजोड़ में सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में डेरा प्रबंधन द्वारा तस्वीरों के प्रसार पर रोक को राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

डेरा नीति में इंटरनेट मीडिया प्रयोग सीमित

गौरतलब है कि डेरा की नीति के अनुसार व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम या एक्स जैसे सोशल मीडिया माध्यमों से आधिकारिक जानकारी साझा करने पर पहले से ही रोक है। परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर भी प्रतिबंध है और श्रद्धालुओं को प्रवेश द्वार पर अपने फोन जमा कराने होते हैं। बावजूद इसके, अंदर रहने वाले कुछ अनुयायी गतिविधियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते रहे हैं।

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