पंजाब में जेलों और पुलिस थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को विस्तृत जवाब दाखिल किया है।

सरकार ने स्वीकार किया कि फिलहाल राज्य के किसी भी पुलिस स्टेशन में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग लॉकअप की व्यवस्था मौजूद नहीं है, हालांकि इसके लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की जा रही है।

यह मामला याचिकाकर्ता सुनप्रीत सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में उठाया गया है, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए जेलों और पुलिस थानों में अलग वार्ड, लाकअप और शौचालय बनाने के साथ-साथ उनकी पहचान सुनिश्चित करने और सुरक्षा के लिए विशेष तंत्र विकसित करने की मांग की गई है।

ट्रांसजेंडर बंदियों के लिए अलग सेल

पूर्व में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा था कि क्या पुरुष और महिला ट्रांसजेंडर बंदियों के लिए अलग सेल बनाए गए हैं, विशेषकर तब जब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्तर से इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके थे। सरकार की ओर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि इस दिशा में फील्ड इकाइयों को आवश्यकताओं और खर्च का आकलन करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके आधार पर राज्यभर में अलग लाकअप स्थापित करने के लिए 258 करोड़ 61 लाख 75 हजार रुपये की राशि का अनुमान तैयार किया गया है। हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस परियोजना के लिए धन आवंटन का मामला गृह विभाग के समक्ष विचाराधीन है।

ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल के गठन को दी गई मंजूरी

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान के संबंध में सरकार ने बताया कि वर्तमान में यह प्रक्रिया नजदीकी सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण या फिर आधार कार्ड अथवा वोटर कार्ड जैसे दस्तावेजों के सत्यापन के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है।इस बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य स्तर पर “ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल” के गठन को भी मंजूरी दे दी है

यह सेल पुलिस विभाग के अधीन कार्य करेगा और इसके लिए आवश्यक ढांचा, मानव संसाधन तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई 30 अप्रैल तक स्थगित कर दी।

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