नवंबर 2025 में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व में शामिल होने के लिए लगभग 2,000 सिख श्रद्धालु वाघा बॉर्डर के रास्ते लाहौर पहुंचे। इनके साथ सरबजीत कौर नाम की एक महिला भी थी। 13 नवंबर को सभी तीर्थयात्री भारत लौट आए, लेकिन सरबजीत कौर वापस नहीं आईं।

सरबजीत कौर पाकिस्तान ही रह गई। उसने वहां धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल कर लिया। सरबजीत ने यह कदम क्यों उठाया और आखिर क्यों उसने पाकिस्तान जाने का फैसला किया। इस आर्टिकल में हम सरबजीत की कहानी जानेंगे, इसके साथ ही पढ़ेंगे कि आखिर अब पाकिस्तान सरकार उसे भारत भेजने पर आमादा क्यों हो रही है।

नौ साल पहले शुरू हुई थी बातें

दरअसल सरबजीत कौर की नौ साल पहले यानि 2017 में सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तान के शेखूपुरा निवासी नासिर हुसैन से बातचीत शुरू हुई थी। जिसके बाद ये बातें दोस्ती बदली और दोस्ती प्यार में। देखते ही देखते ये प्यार इतना गहरा हो गया कि सरबजीत ने उससे पाकिस्तान जाकर निकाह करने का विचार किया और साल 2025 में गुरु नानक देव जी की जयंती पर करतार साहिब जा रहे श्रद्धालुओं के जत्थे में शामिल होकर पाकिस्तन पहुंची और फिर भारत वापिस नहीं लौटी।

नासिर हुसैन से निकाह करने के लिए ही वो पाकिस्तान रह गई। उसने इस्लाम अपनाकर अपना नाम ‘नूर फातिमा’ रखा और निकाह कर लिया और फिर वह पाकिस्तान में ही रहने लगीं। लेकिन अब पाकिस्तान सरकार उसे भारत डिपोर्ट करने की तैयारी में जुटी है। बढ़ते दबाव को देखते हुए सरबजीत कौर और हुसैन ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस पर छापेमारी और विवाह खत्म करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। फिर कोर्ट ने पुलिस को दोनों को परेशान न करने का आदेश दिया था।

अपनी इच्छा से पाकिस्तान गई सबरजीत कौर

याचिका में सरबजीत कौर ने बताया कि वह तलाकशुदा हैं और पिछले नौ वर्षों से नासिर हुसैन को सोशल मीडिया पर जानती थीं। उनका कहना था कि वे अपनी इच्छा से पाकिस्तान आईं और विवाह किया। साथ ही उन्होंने अपने वीजा को बढ़ाने और पाकिस्तानी नागरिकता के लिए दूतावास से संपर्क भी किया था।

पाकिस्तान के पंजाब (लाहौर) हाईकोर्ट ने सरबजीत कौर उर्फ नूर फातिमा मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कैबिनेट, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री, एफआईए के डीजी, पंजाब पुलिस के आईजी, ईटीपीबी और अन्य अधिकारियों को दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

उनका कहना था कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद पाकिस्तान में सरबजीत का रहना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मसला है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर तुरंत भारत भेज दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह बताया जाए कि सरबजीत सिख जत्थे से कैसे अलग हुईं, उनका डिपोर्टेशन किस स्थिति में है, उन्हें कानूनी तौर पर किसके हवाले किया गया और जिन पुलिस अधिकारियों की लापरवाही हुई, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, यात्रा वीजा के दुरुपयोग से सिख समुदाय को हुए नुकसान का भी विवरण मांगा गया है।

पाकिस्तान जाकर अपनाया इस्लाम धर्म

सरबजीत कौर, जिन्होंने लाहौर के नासिर हुसैन से शादी कर इस्लाम कबूल किया और नूर फातिमा नाम रखा, फिलहाल लाहौर के दारुल अमान में रखी गई हैं। मेडिकल टीम ने उनकी सेहत को ठीक बताया है, लेकिन पाकिस्तान की इंटीरियर मिनिस्ट्री ने अभी तक उन्हें एक्जिट परमिट देने पर फैसला नहीं लिया है।

5 जनवरी को उन्हें भारत भेजने की कोशिश की गई, लेकिन वाघा बॉर्डर बंद होने और कानूनी अड़चनों के कारण यह संभव नहीं हो सका।पाकिस्तान में इस समय दो याचिकाएं चल रही हैंएक में पाकिस्तानी नागरिकता और सुरक्षा देने की मांग है, जबकि दूसरी में तुरंत डिपोर्टेशन की अपील की गई है।

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