सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा की अर्जी पर सुनवाई 11 मार्च तक टाल दी। हवारा ने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी भी जेल में ट्रांसफर करने की मांग की थी। बब्बर खालसा का यह आतंकवादी 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के स्थगन की मांग के बाद मामले को टाल दिया। पिछले साल 27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हवारा की अर्जी पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली और पंजाब सरकारों को नोटिस जारी किए थे। 1995 में हुआ था धमाका हवारा 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सेक्रेटेरिएट के एंट्रेंस पर हुए ब्लास्ट से जुड़े मामले में अपनी बाकी की जिंदगी जेल में काट रहा है। इस हमले में बेअंत सिंह और 16 अन्य मारे गए थे। सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई अर्जी में कहा गया है कि 22 जनवरी, 2004 को जेल से भागने के एक कथित मामले को छोड़कर, जेल में हवारा का व्यवहार बेदाग रहा है। इसमें कहा गया है कि उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी दूसरी जेल में ट्रांसफर कर दिया जाना चाहिए क्योंकि नेशनल कैपिटल में उसके खिलाफ कोई केस पेंडिंग नहीं है। इसमें कहा गया है, “पिटीशनर (हवारा) अभी पंजाब राज्य में रजिस्टर्ड एक केस में अपनी बाकी ज़िंदगी तक उम्रकैद की सज़ा काट रहा है… वह पंजाब राज्य, फतेहगढ़ साहिब जिले का रहने वाला है, और उसे पंजाब की जेल में रखा जाना चाहिए। 36 झूठे केस लगाए गए अर्जी के मुताबिक, मर्डर के बाद अर्जी देने वाले पर 36 झूठे केस लगाए गए थे और एक को छोड़कर सभी में उसे बरी कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इसी केस में और जेलब्रेक में शामिल एक व्यक्ति को तिहाड़ से चंडीगढ़ की जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। याचिका में कहा गया कि सिर्फ़ यह बात कि याचिकाकर्ता को सालों पहले हाई-रिस्क कैदी माना जाता था, आज कैदी को दिल्ली में रखने और उसे पंजाब न भेजने का काफी कारण नहीं है साथ ही यह भी कहा गया कि उसकी बेटी पंजाब में है। हवारा की पत्नी की मौत हो चुकी है और उसकी मां अमेरिका में कोमा में है। याचिका में कहा गया कि इस मामले में सवाल यह उठता है कि क्या एक ऐसा व्यक्ति जिस पर गंभीर सामाजिक उथल-पुथल के दौरान हत्या करने का आरोप है, लेकिन जो पिछले 19 सालों से बिना किसी बेदाग़ी के जेल में ज़िंदगी बिता रहा है, वह इस कोर्ट से पंजाब की जेल में ट्रांसफर के लिए ऑर्डर मांग सकता है। मार्च 2007 में मिली थी सजा बता दें कि मार्च 2007 में, हवारा को इस मामले में एक ट्रायल कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई थी। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2010 में उसकी सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया और यह निर्देश दिया कि उसे बाकी ज़िंदगी जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। हवारा की याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उसकी और प्रॉसिक्यूशन की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। Post navigation विदेश में बैठे अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी। इंटरपोल से ‘ सिल्वर नोटिस’ जारी कराने की प्रक्रिया तेज, बैंक खाते और वाहन किए जाएंगे सील। पंजाब के एक सरकारी स्कूल में पाईगई अनियमितताओं के बाद शिक्षा मंत्री के निर्देश पर छह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।