वेरका के सूखे दूध को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सेना ने गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताते हुए लगभग 125 मीट्रिक टन दूध को खारिज कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार आर्मी सर्विस कोर की जम्मू स्थित इकाई की ओर से लुधियाना जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को पत्र भेजकर सूचित किया गया कि वेरका की लुधियाना इकाई से आपूर्ति किया गया होल मिल्क पाउडर निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसी कारण दो बैचों को खारिज किया गया है।

गुणवत्ता से जुड़ा है मामला

कुल मिलाकर करीब 125 मीट्रिक टन सूखा दूध अस्वीकार किया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दूध को खारिज करने का कारण उसकी गुणवत्ता से जुड़ा है। इस संबंध में भेजे गए पत्र की प्रति रक्षा मंत्रालय के खरीद और खाद्य निरीक्षण संगठन के मुख्य निदेशक को भी भेजी गई है, ताकि मामले की उच्च स्तर पर निगरानी की जा सके।

वहीं, मिल्कफैड के प्रबंध निदेशक राहुल गुप्ता ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में हाल ही में आया है और इसकी गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य का दुग्ध सहकारी संस्थान देश के अग्रणी संगठनों में से एक है और यहां उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

मिल्कफैड ने दोबारा नमूने लेने का किया अनुरोध

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्राथमिक तौर पर गुणवत्ता में किसी बड़ी कमी की पुष्टि नहीं हुई है। मिल्कफैड ने सेना से दोबारा नमूने लेने का अनुरोध किया है, जिस पर सैन्य अधिकारी सहमत हो गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में समस्या कहां उत्पन्न हुई। फिलहाल, इस पूरे मामले ने दुग्ध आपूर्ति और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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