पंजाब में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के क्रियान्वयन में योजना और वित्तीय प्रबंधन की कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के दौरान केंद्र की ओर से 5129.12 करोड़ रुपये की मंजूरी के मुकाबले राज्य को सिर्फ 749.46 करोड़ रुपये (करीब 15 प्रतिशत) केंद्रीय हिस्सा ही प्राप्त हो सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि फंड का पूरा लाभ न मिल पाने का प्रमुख कारण राज्य स्तर पर योजनाओं की कमजोर तैयारी और आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा न कराना रहा। जल शक्ति मंत्रालय ने नवंबर 2024 में भी इस बात का उल्लेख किया कि राज्य द्वारा जरूरी दस्तावेज जमा न करने के कारण केंद्रीय हिस्से की पूरी राशि जारी नहीं हो सकी। रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत वार्षिक कार्य योजनाएं सही तरीके से तैयार नहीं की गईं। कई योजनाएं री-वेरिफाइड बेसलाइन डेटा, गांव स्तर की योजनाओं (विलेज एक्शन प्लान) और राज्य कार्य योजना (स्टेट एक्शन प्लान) के बिना ही तैयार की गई। इसी वजह से मिशन के लक्ष्य भी प्रभावित हुए। राज्य सरकार ने अपना हिस्सा जारी करने में देरी की 2019-24 के दौरान योजना के तहत 17.48 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) देने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद रिपोर्ट में बताया गया कि अप्रैल 2023 तक राज्य ने 5.55 लाख कनेक्शन देकर ही 100 प्रतिशत कवरेज का दावा कर दिया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि केंद्र से फंड मिलने के बाद राज्य सरकार द्वारा अपना हिस्सा जारी करने में भी काफी देरी हुई। उदाहरण के तौर पर 13 दिसंबर 2021 को केंद्र से 402.24 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन राज्य सरकार ने मई 2022 से जुलाई 2023 के बीच 538 दिन की देरी के साथ सिर्फ 392.88 करोड़ रुपये ही जारी किए। उपयोग प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हुई इसके अलावा केंद्रीय हिस्से के मुकाबले राज्य का हिस्सा 9.36 करोड़ रुपये कम रहा। देरी के कारण राज्य पर ब्याज देनदारी भी बनी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जल जीवन मिशन को लागू करने में कई संरचनात्मक और संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आईं। वार्षिक कार्य योजनाएं असंगठित होने के कारण पहले से पाइप जल आपूर्ति वाले घरों का सही रिकॉर्ड भी तैयार नहीं हो पाया। इसके परिणामस्वरूप फंड के उपयोग में कमी आई और उपयोग प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हुई, जिससे केंद्र की अगली किस्त जारी होने में बाधा पैदा हुई। इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर गांव जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्लयूएससी) को भी पर्याप्त जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिससे समुदाय की भागीदारी कमजोर रही। रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता की निगरानी को लेकर भी कमी का उल्लेख किया गया है। ब्लॉक स्तर पर प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी के कारण पानी की गुणवत्ता की निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो पाई। रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) मैपिंग और सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी सीमित उपयोग हुआ, जिससे ग्रामीण जल आपूर्ति प्रबंधन प्रभावित हुआ। Post navigation Kuldeep Singh Dhaliwal ने Narendra Modi पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की नीति Donald Trump चला रहे हैं। बयान के बाद Punjab Legislative Assembly में जमकर हंगामा हुआ।