पंजाब में कितने लोग नशों के आदी हैं और वे किस प्रकार का नशा ले रहे हैं, यह जानने के लिए पिछले दिनों सरकार ने राज्य के 11 विभिन्न गांव में इसका प्रयोगात्मक सर्वे किया थ जो काफी सफल रहा। उसी के परिणम के आधार पर सरकार ने अबपूरे प्रदेश में डोर टू डोर ड्रग एंड सोशियो इक्नामिक जनगणना करवाने का फैसला लिया है। हालांकि इसकी घोषणा बजट में ही की जा चुकी थी और वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने इसके लिए 150 करोड़ रुपए का बजट उपबंध भी कर दिया है। युद्ध:नशों के विरुद्ध को लेकर सरकार ने नशा सप्लाई को तोड़ने का जो प्रयास किया है वह काफी हद तक सफल रहा है लेकिन सप्लाई कम होने के कारण अब वे लोग जो नशा छोड़ना चाहते हैं उनके बारे में जानने का प्रयास है कि आखिर वे किस प्रकार का नशा करते हैं। यह सर्वे इस काम में काफी प्रभावी होने वाला है। इस सर्वे में 28 हजार कर्मचारियों को लगाया जाएगा और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग इसके लिए नोडल महकमा होगा। हालांकि यह एक ऐसा काम माना जा रहा है जिसमें आम तौर पर लोग ज्यादा शामिल नहीं होते क्योंकि उनके परिजनों पर नशेड़ी होने का कलंक लग सकता है लेकिन विभागीय अधिकारी ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि इसीलिए पहले 11 गांव में प्रयोगात्मक सर्वे किया गया है।हमें आशंका थी कि सामाजिक कलंक के कारण परिवार आगे नहीं आएंगे। लेकिन अभिभावक अपने बच्चों को ड्रग्स में जाता देखकर इतने तंग आ चुके हैं कि मदद के लिए आने वाले हर व्यक्ति को वे ईश्वर का भेजा हुआ अवसर मानते हैं। नशे के आदि आखिरी व्यक्ति की पहचान करेगा पंजाब वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा, जिन्होंने इस सर्वेक्षण के लिए 150 करोड़ रुपए का बजट में प्राविधान किया है ने बताया कि इस पहल से सरकार के नशा-विरोधी अभियान को और मजबूती मिलेगी।उन्होंने बताया कि हमें युद्ध नशों के विरोध अभियान में आपार सफलता मिली है। अब हम नशे के आदी आखिरी व्यक्ति की भी पहचान करना चाहते हैं। इससे न केवल सरकार की जिम्मेदारी बनेगी कि हर नशेड़ी को नशामुक्ति केंद्र भेजा जाए, बल्कि नशे की आपूर्ति करने वाले तस्करों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी। इससे कानून प्रवर्तकों और तस्करों के बीच किसी भी प्रकार के गठजोड़ को तोड़ने में भी मदद मिलेगी। चीमा ने कहा कि जनगणना की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘आवश्यक आधारभूत कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जिनमें समर्पित सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का विकास और क्षेत्र के कर्मचारियों का व्यापक प्रशिक्षण शामिल है, ताकि सटीकता, पारदर्शिता और डेटा की अखंडता सुनिश्चित की जा सके। अनुमान के अनुसार 30 लाख लोग प्रभावित चीमा ने कहा कि ‘पिछले एक वर्ष में, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 52,331 नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ 36,686 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों के माध्यम से 33,000 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थों की जब्ती की गई। पंजाब के अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में होने वाली ओपीडी और चंडीगढ़ स्थित पीजीआई द्वारा किए गए शोध सहित पिछले अध्ययनों में अनुमान लगाया गया था कि पंजाब में 30 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं। हमें यह भी पता करना है कि किस प्रकारका नशा लोग कर रहे हैं ताकि उसको छुड़वाने के लिए उस प्रकार कीनीति बनाई जा सके। पंजाब में नशीली दवाओं का खतरा एक राजनीतिक रूप से विवादास्पद मुद्दा है। 2012 में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह दावा करके विवाद खड़ा कर दिया था कि पंजाब के 70 प्रतिशत युवा नशे के आदी हैं। सत्ताधारी गठबंधन ने राहुल गांधी के इस बयान पर उन पर पंजाब को बदनाम करने का आरोप लगाया। Post navigation Punjab में 35 ऑक्सीजन प्लांट बंद होने पर Punjab and Haryana High Court ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने सरकार से पूरे मामले पर विस्तृत हलफनामा मांगा है। Indian Army ने Verka का 125 मीट्रिक टन सूखा दूध खारिज कर दिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए Punjab State Cooperative Milk Producers Federation (मिल्कफेड) ने जांच के आदेश दे दिए हैं।