जालंधर की जिला एवं सत्र अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सास और बहू को बरी कर दिया है। अदालत ने यह निर्णय सबूतों के अभाव और आरोप साबित न होने के आधार पर सुनाया।

यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्भओ सिंह गिल की अदालत में सुनाया गया। अदालत ने आंचल पुत्री राजकुमार उर्फ राजू और उसकी मां रजनी पत्नी राजकुमार उर्फ राजू, दोनों निवासी संसारपुर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।यह मामला 21 अगस्त 2021 को थाना जालंधर कैंट में दर्ज किया गया था। मामले में मृतक अभिषेक उर्फ अभि के पिता शम्मी ने पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की शादी आंचल के साथ हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही उसकी पत्नी और सास उसे मानसिक रूप से परेशान करती थीं।

तलाक लेने का दबाव बनाने के आरोप लगे थे

शिकायत के अनुसार, दोनों महिलाएं लगातार अभिषेक पर तलाक लेने का दबाव बना रही थीं। इसी कारण वह मानसिक तनाव में रहने लगा था। बताया गया कि घटना से कुछ समय पहले वह अपनी ससुराल में रह रहा था और उसी दौरान विवाद बढ़ता गया।

शिकायत में यह भी कहा गया था कि घटना वाले दिन अभिषेक अपनी पत्नी और सास से नाराज था और मानसिक दबाव के चलते उसने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी।

आरोप साबित न होने की सूरत में कोर्ट ने लिया निर्णय

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य प्रस्तुत साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। सुनवाई के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि शिकायत पक्ष अपने आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि ठोस और स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध न हों।

इसी आधार पर दोनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत समाप्त हो गया है, जबकि इस निर्णय को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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