फाजिल्का में नगर कौंसिल चुनाव की आधिकारिक घोषणा भले अभी नहीं हुई हो, लेकिन चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। इसकी मुख्य वजह चुनाव आयोग द्वारा जारी नई आरक्षण सूची है, जिसने पूरे राजनीतिक समीकरण बदलकर रख दिए हैं।

नई सूची के अनुसार नगर कौंसिल के 25 वार्डों में आरक्षण की श्रेणियों में बड़ा बदलाव किया गया है। कई वार्डों की श्रेणी बदलने से उन मौजूदा पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों की रणनीति पर सीधा असर पड़ा है, जो पिछले एक वर्ष से अपने-अपने वार्डों में चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें अपने राजनीतिक समीकरण नए सिरे से बनाने पड़ रहे हैं।

आरक्षण ने बदली तस्वीर

बता दें कि इससे पहले नगर कौंसिल द्वारा नई वार्डबंदी को लेकर अधिसूचना जारी की गई थी, जिसका उस समय कांग्रेस के बोर्ड ने विरोध किया था। पार्षदों ने प्रस्ताव पास कर इस वार्डबंदी को खारिज कर दिया था और मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच गया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अधिसूचना वापस ले ली थी। हालांकि वार्डबंदी तो लागू नहीं हुई, लेकिन आरक्षण में हुए बदलाव ने चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

नई स्थिति में कई पार्षद अपने पुराने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। ऐसे में कई नेता अब दूसरे वार्डों में अपनी पकड़ बनाने और टिकट हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वहीं मतदाता सूची में संशोधन के लिए आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी जारी है।

नई स्थिति में कई पार्षद अपने पुराने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। ऐसे में कई नेता अब दूसरे वार्डों में अपनी पकड़ बनाने और टिकट हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वहीं मतदाता सूची में संशोधन के लिए आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी जारी है।

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मंथन कर रही पार्टियां

राजनीतिक दलों की बात करें तो कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, भाजपा और अकाली दल सभी अपने-अपने स्तर पर मंथन कर रहे हैं। हर दल यह तय करने में जुटा है कि किस वार्ड में किस उम्मीदवार को उतारा जाए।

नई आरक्षण सूची के अनुसार तीन वार्ड अनुसूचित जाति, चार वार्ड अनुसूचित जाति महिला, एक वार्ड पिछड़ा वर्ग, आठ वार्ड सामान्य महिला और नौ वार्ड सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित किए गए हैं। यह बदलाव कई पुराने समीकरणों को तोड़ रहा है और नए राजनीतिक गठजोड़ों को जन्म दे रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार चुनाव पहले से कहीं अधिक रोचक और जटिल होगा। सत्ता परिवर्तन के बाद जहां कांग्रेस को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, वहीं सत्ताधारी दल को भी जीत के लिए पूरी ताकत लगानी होगी।

कुल मिलाकर फाजिल्का नगर कौंसिल चुनाव इस बार नए चेहरे, नई रणनीति और बदले समीकरणों के बीच बेहद दिलचस्प मुकाबले के रूप में सामने आने वाले हैं।

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